वृंदावन कुंभ 2021
इतिहास, हाथियों का रेला होता था आकर्षण का केंद्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वृंदावन में संतों और साधकों से मुलाकात कर उन्हें ब्रज क्षेत्र का विकास करने का आश्वासन दिया. सीएम योगी बोले, इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार धर्मगुरुओं संग मिलकर काम कर रही है.
इतिहास, हाथियों का रेला होता था आकर्षण का केंद्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वृंदावन में संतों और साधकों से मुलाकात कर उन्हें ब्रज क्षेत्र का विकास करने का आश्वासन दिया. सीएम योगी बोले, इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार धर्मगुरुओं संग मिलकर काम कर रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वृंदावन में संतों और साधकों से मुलाकात कर उन्हें ब्रज क्षेत्र का विकास करने का आश्वासन दिया. सीएम योगी बोले, इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार धर्मगुरुओं संग मिलकर काम कर रही है. हम इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे. सीएम योगी ने यह भी कहा कि आजादी के बाद सरकारों ने धार्मिक पर्यटन के लिए काम नहीं किया. उन्होंने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पर काम हो रहा है. प्रयागराज का कुंभ मेला धार्मिक पर्यटन के विकास का एक और उदाहरण है. अयोध्या भी एक विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित हो रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद की स्थापना की गई है और विकास की कई परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं. इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर जाकर दर्शन किए.
वृंदावन कुंभ मेला 40 दिन तक चलेगा. महाकुंभ की तरह वृंदावन कुंभ में वैष्णव संतों का जमावड़ा यहां की विशेषता रही है. उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद यमुना नदी किनारे यह धार्मिक आयोजन कर रहा है. वृंदावन कुंभ बैठक मेले में देशभर से हजारों साधु-संत शामिल होंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने भव्य व्यवस्थाएं की हैं. वैसे तो कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में होता रहा है, ऐसे में लोगों में जिज्ञासा है कि वृंदावन में कौन से कुंभ मेले का आयोजन किया जा रहा है.
वृंदावन कुंभ को दिव्य कुंभ या वैष्णव कुंभ भी कहा जाता है. वृंदावन में कुंभ लगने की परंपरा बहुत पुरानी है. हालांकि ऐतिहासिक तथ्य पर इसकी प्राचीनता की गणना स्पष्ट नहीं है. दावा है कि औरंगजेब के शासनकाल में सनातन धर्म के लिए संकटपूर्ण समय में भी यमुना किनारे लोगों का समागम होता रहता था.
हरिद्वार में जो कुंभ होता है, उसमें शैव संप्रदाय के नागा साधुओं का आधिपत्य रहता है. वैष्णव साधुओं से उनके बीच मतभेद की खबरें भी आती रहती हैं. हरिद्वार कुंभ से पहले वैष्णव साधक वृंदावन में एकजुट होकर हरिद्वार के लिए रवाना होते थे.
हरिद्वार कुंभ से पहले वृंदावन कुंभ का आयोजन किया जाता रहा है. इस कुंभ का इतिहास बहुत रोचक है. इस कुंभ के लिए कभी हाथियों के रेले निकलते थे और संतो की विशेष सवारियां होती थीं. साधु-संतों के बीच ये हाथी कौतूहल का विषय होते थे. हालांकि अब यहां हाथी नहीं लाए जाते. 1986 के कुंभ में एक हाथी उत्तेजित हो गया था, जिसे बड़ा हादसा हुआ था. इस मेले में सांप भी आकर्षण का केंद्र होते थे.
मथुरा. धर्म नगरी वृंदावन में 16 फरवरी से शुरू हो रहे वैष्णव कुंभ मेला बैठक में आने वाले साधु संतों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जहां मेला क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। वहीं ड्यूटी के लिए आने वाले पुलिस कर्मियों की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में रिजर्व पुलिस लाइन की स्थापना की गई है।
वृन्दावन में लगने बाले कुम्भ पूर्व बैष्णव बैठक मेले को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। मंगलवार को पुलिस लाइन का शुभारंभ पूरी तरह से भक्ति भाव के साथ किया गया। जहां डीएम नवनीत सिंह चहल, एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर सहित अन्य अधिकारियों ने वेदपाठी ब्राह्मणों के आचार्यत्व में वेद मंत्रों की ध्वनि के मध्य पूजा अर्चना की और हवन यज्ञ में आहूति देकर ठाकुरजी से मेला को सकुशल संपन्न कराने की प्रार्थना की। वही एस.एस.पी ने बताया कि 14 फ़रवरी को मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर भी तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री जहाँ भी उनका प्रोग्राम लगेगा वहाँ सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रहेगी।
मथुरा. बसंत पंचमी पर मंगलावर को तीनों अनि अखाड़ों ने श्रीमहंतों और अन्य संतों की मौजूदगी में अपने अपने अखाड़ों की ध्वजा का रोहण किया जिसके साथ ही वृंदावन में यमुना किनारे कुम्भ को शुरुआत हो गई। ध्वजारोहण से पहले शाही शोभायात्रा निकाली गई जिसमें ठाकुर जी का डोला, संत, महंत, महामंडलेश्वर और भक्तों की टोलियां भी शामिल हुईं। राजशाही परंपरा के तहत यह शोभायात्रा निकली।
बता दें कि यमुना तट पर यह 12 बरस में एक बार बसंत पंचमी से यमुना किनारे कुम्भ का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि वृंदावन राधा-कृष्ण के प्रेम की भूमि है। यहां रसिक भाव से वैष्णव मत के साधु संत अपने अराध्य की पूजा अर्चना करते हैं। वृंदावन में इस वैष्णव कुंभ में शैव (नागा) संन्यासी नहीं आते हैं। बसंत पंचमी को धार्मिक अनुष्ठान के साथ यमुना किनारे ध्वजारोहण का कार्यक्रम हुआ जिसमें तीनों अनि अखाड़ों में ध्वजा रोहण किया। ध्वजा रोहण में निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास, दिगंबर अनी अखाड़ा के श्रीमहंत कृष्णदास, निर्मोही अनी अखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्रदास के साथ ही अन्य साधु संत भी मौजूद रहे।ध्वजारोहण के बाद यमुना किनारे कुम्भ को शुरुआत हो गई है और यहां 28 मार्च तक कुम्भ का आयोजन चलेगा।
वृंदावन कुम्भ के बारे में कोई सटीक प्रमाण तो नहीं हैं लेकिन मान्यता है कि जब समुद्र मंथन हुआ, तब उसमें से निकले अमृत कलश को लेकर गरुड़ जी चले। गरुड़ भगवान अमृत कलश को लेकर जब वृंदावन पहुंचे, तब उन्होंने यमुना किनारे कदंब वृक्ष पर उस अमृत कलश को रख दिया और विश्राम करने लगे। यहां विश्राम करने के बाद गरुड़ भगवान उस कलश को लेकर नासिक, उज्जैन, प्रयागराज, हरिद्वार गए। जहां अमृत कलश से बूंद छलकने के कारण वहां कुंभ लगने लगा और वृंदावन में उनके विश्राम करने के बाद यहां इस आयोजन की परंपरा शुरू हुई।
यमुना किनारे केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच करीब 40 हेक्टेयर भूमि पर मेले की तैयारियों को लेकर पीडब्लूडी विभाग ने शासन को 648.56 लाख रुपए का इस्टीमेट भेज दिया है। शासन से धनराशि स्वीकृत होने के बाद संत समागम स्थल के विकास कार्यों की शुरुआत कर देगा। बुधवार को मथुरा पहुंचे कमिश्नर आगरा मंडल अनिल कुमार ने कुंभ मेला के संबंध में जिले के सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तार से चर्चा की और अधीनस्थों को दिशा निर्देश दिए।
संतों और आगन्तुकों के लिए उपलब्ध होगा गंगाजल
अर्द्धकुंभ को लेकर यमुना में मेले के दौरान अतिरिक्त पानी छोड़े जाने और संतों और आगन्तुकों को पीने के लिए गंगाजल की उपलब्धता कराने के संबंध में जल शक्ति एवं जल निगम के अधिकारियों से चर्चा की गई। समागम स्थल पर पेयजल सप्लाई के लिए पाइप लाइन डाली जाएगी। यमुना जल की शुद्धता के लिए भी विशेष ध्यान रखा जाएगा तथा अतिरिक्त पानी यमुना में छोड़ा जाएगा।
यमुना पर बनेंगे पौन्टून पुल, बनेगा 25 बेड का अस्पताल
केशीघाट और देवराहा बाबा घाट के बीच लोकनिर्माण विभाग द्वारा 2 पौंटून पुल का बनाए जाएंगे। इसके साथ ही समागम स्थल की सड़कें, वॉच टावर के साथ ही आयोजन स्थल पर ईको फ्रेंडली शौचालयों का निर्माण, पंडाल बनवाना, एलईडी स्ट्रीट लाइट और मेला क्षेत्र को पॉलीथिन मुक्त करने की जिम्मेदार नगर निगम को सौंपी है। लोक निर्माण विभाग आयोजन स्थल तक पहुंचने वाली सड़कों की मरम्मत एवं नई सड़क अथवा पांटून पुलों का निर्माण आदि कार्य कराएगा।
चिकित्सा विभाग की ओर से समागम स्थल पर 25 बेड का अस्पताल, डिस्पेंसरी तथा ऐंबुलेंस की व्यवस्था आदि करने के लिए भी बैठक में चर्चा की गई। इस आयोजन के दौरान समागम स्थल पर ही संतों को उचित दाम पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके इसके लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को उचित दरों पर राशन उपलब्ध कराना होगा।
संस्कृति ग्राम में होगा कृष्ण लीलाओं से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन
वृन्दावन कुम्भ में पर्यटन विभाग और सूचना विभाग द्वारा मेले के प्रचार प्रसार और सजावट की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्वागत द्वार भी बनाए जाएंगे। यहां पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा संस्कृति ग्राम स्थापित किया जाएगा, जहां नियमित रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही कृष्ण लीलाओं का मंचन होगा। मेले में आवागमन के लिए रोडवेज द्वारा वृन्दावन के लिए अतिरिक्त बसों का संचालन होगाा