Sunday, January 31, 2021

पुत्रवती जुबती जग सोई। 
रघुपति भगतु जासु सुतु होई॥
नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। 
राम बिमुख सुत तें हित जानी॥1॥

भावार्थ
संसार में वही युवती स्त्री पुत्रवती है, जिसका पुत्र श्री रघुनाथजी का भक्त हो। नहीं तो जो राम से विमुख पुत्र से अपना हित जानती है, वह तो बाँझ ही अच्छी। पशु की भाँति उसका ब्याना (पुत्र प्रसव करना) व्यर्थ ही है॥1॥



कहा जाता है कि पहले यमुना की तीन धाराएं बहा करती थी जिनमें एक वृंदावन से बहती थी जिस हम वर्तमान में भी देख सकते हैं अर्थात वह वर्तमान में भी स्थित है। 
दूसरी धारा बरसाने बहा करती थी तथा तीसरी धारा गोवर्धन से बहती थी ।
और जहां यह तीनों धाराएं मिलती थी या उनका संगम होता था। उसका  स्थान था यमुनावत। 

गोविंद कुंड में आप गाय बछड़े बंदर आदि को देख सकते हैं जब भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की पूजा रखवा ही तो भ्रष्ट हो गया।क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि कोई और उनकी पूजा करें और इंद्र अब घमंडी हो चुका था।
पहले गुरु ब्राह्मण गए उसके बाद गिरिराज गोवर्धन की पूजा और उसके बाद प्रसाद का वितरण।कृष्ण पूजा कर रहे हैं और कृष्ण की पूजा कर रहे हैं पुजारी भी खुद और पूजा भी खुद बड़े स्वरूप में प्रकट हो गए।
गाड़ी भर भर प्रसाद और सारा खा गए और फिर मांगने लगी और 23 स्थान का नाम अन्य और हो गया बृजवासी बोले तेरा तो प्रभु बड़ा बहू का है हमारे लिए भी नहीं बचा और मांग रहा है तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा आप के पेट में तो असीम ब्रह्मांड है और इससे हम तरफ नहीं कर सकते यह लीजिए तुलसी और मानसी गंगा का जल और प्राप्त हुई है उसके बाद गिरिराज गोवर्धन तत्व पूजा छूटने पर भयंकर बारिश शुरू कर दी सारी बृजवासी गोवर्धन के नीचे आगे गोपिया गाय बैल 7 दिन तक बहुत सुंदर दृश्य
मधु माफी कैसे मांगे तब उन्होंने सुरभि गाय को आगे किया वही तुम्हें कृष्ण के पास ले जाएगी और वही उसकी बात मानेंगे तब यहां आए उन्होंने क्षमा मांगी और अपने साथ लाए हुए ऐरावत हाथी की गंगा से स्थान पर अभिषेक किया इस कारण उसका नाम गोपाल कुंडू है आप तो गाय को वालों को आनंद देने वाले यात्रा ना हारो इसलिए आपका नाम आ से गोपाल होगा इसका नाम गोपाल कुंड या गोविंद कुंड पड़ गया।
इस प्रकार इंद्र का अभिमान चूर चूर हुआ और क्षमा मांग कर भगवान को किसने किया

गोविंद कुंड में हमने सुना था कि इंद्र को जब एहसास हुआ कि उन्होंने गड़बड़ कर दी कि उन्होंने कृष्ण को रोशन कर दिया है और ब्रज वासियों को उन्होंने की कोशिश की है तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया तो भगवान से माफी मांगने के लिए उनकी प्रिय गांव सुरभि को साथ लेकर आए तब उन्होंने अपने स्थान के दूध से कृष्ण को स्नान कराया गांव के रक्षक होने के कारण उनका नाम गोविंद पड़ा इंद्र में आर सी है रावत से आकाशगंगा ओके जान से गोपाल कौन बनाया और गाय सुरभि ने सुरभी कुंड की स्थापना की वरना मैं इनकी पुणे स्थापना की। यह स्नान और आसमान करने से पाप और अपराध दूर हो जाते हैं और ब्रिज पर प्राप्त होते हैं।

उधर कुंड
जब भगवान कृष्ण द्वारिका चले गए तो जो लगभग 2:30 किलोमीटर पहले है राधा कुंड से और धरातल से अपने लीला समाप्त कर कॉल लॉग चले गए उस समय जो कृष्ण की 16108 रानियां हैं वे बड़ी दुखी थी और वे सारी की सारी द्वारिका से वृंदावन आ गई और उन्होंने यमुना जी का दर्शन किया तब यमुना जी बहुत आनंदित महसूस हुई तब उन्होंने यमुना जी से पूछा कि यह बने हम तो कृष्ण ग्रह में स्थापित हो रही हैं और तुम आनंदित हो रही है तो इसका क्या कारण है जो यमुना जी ने बताया कि मैं राधा जी की निरंतर सेवा करती हूं और इसी कारण मुझे कृष्ण कभी नहीं सताते लकीर राधा कृष्ण शाश्वत शक्तिमान है और उनकी शक्ति राधा रानी है इस प्रकार कृष्णा आज ग्राम है और उनकी आत्मा है राधिका इसलिए वह राधिका रमण कहलाते हैं यदि रमण कहलाते हैं यदि तुम्हें उव का सानिध्य प्राप्त हो जाए तो तुम्हें भी ऐसा ही सुख प्राप्त होगा।
उद्धव जी को उन्होंने बद्री का आश्रम में भेज दिया लेकिन वह एक से यहां गोवर्धन तलहटी में निवास करते हैं यमुना जी के बताने पर वे यहां पर आ गए और उद्धव जी को ढूंढने लगे मोदी इसी स्थान पर मिले। बृज नाम और परीक्षित के साथ यही बैठकर रानियां कृष्ण भजन करने लगे तभी उधर जी यहां प्रकट हुए और कीर्तन की शोभा उन्होंने बढ़ा दी।
उद्धव जी से भी यही प्रश्न किया है यहां उद्धव जी ने 1 महीने देकर श्रीमद्भागवत का पाठ किया तुम कल परपर विजय प्राप्त करो नहीं तो वह कुछ ना कुछ विद नहीं जरूर डालेगा। फिर मैं श्रीमद्भागवत से वंचित रह जाऊंगा तो उन्होंने कह नहीं आप ही एकमात्र हो और सुखदेव जी के मुख से सुनने वाले हो।तुम्हारे माध्यम से पूरा जगत श्रीमद्भागवत का श्रवण करेगा।
सभी यहां प्रकट हुए हैं। उधर मैं तुमसे इतना प्रेम करता हूं कि जितना अपने पुत्र ब्रह्मा से नहीं करता अपने भाई संकर्षण से नहीं करता अपने भक्त शिव से नहीं करता और अपनी पत्नी शिवनी शिव से नहीं अपनी पत्नी लक्ष्मी से नहीं करता औरों की तो बात ही क्या मैं खुद से भी नहीं करता और इतना प्रेम मैं तुमसे कहता हूं।
उद्धव जी ने गुरु बृहस्पति जी से सारी शिक्षा प्राप्त कर ली थी मातृप्रेम को छोड़कर किसी को सीखने के लिए यहां पर भेजा था
मुझे इन चरणों की रज प्राप्त हुआ मैं से मस्तक पर धारण करना चाहता हूं मुझे यहां घुलमिल आता है या औषधि का कोई भी जल में मिल जाए जो धरती के ऊपर जाते हैं और यहीं पर जफीर गुजरेंगे तो उनके चरणों में चलकर जाए तो उनके रोज प्राप्त हो और यहां पर आरोप में तिनके के रूप में यहां बैठे हैं गोपियों के चरणों की प्रार्थना।


संकर्षण कुंड गोवर्धन परिक्रमा

संकर्षण कुंड

यह स्थान आन्योर के निकट स्थित है क्योंकि यहीं पर भगवान ने गिरिराज गोवर्धन को धारण किया था। संकर्षण भगवान बलराम का एक नाम है और इस स्थान का नाम संकर्षण कैसे पड़ा आइए आपको बताते हैं। संकर्षण जी यह जो विग्रह आप देख रहे हैं यह विग्रह पूरे ब्रज मंडल का संकर्षण जी का सबसे बड़ा विग्रह माना जाता है।

संकर्षण कुंड वह स्थान है जहां पर इंद्र वृष्टि का जल गोवर्धन पर्वत के चारों तरफ गिर रहा था तो इतनी भारी मात्रा में जल वृष्टि होने के कारण, इस स्थान की भूमि धंसने लगी तो भगवान श्री कृष्ण ने बलराम जी को इशारा किया कि वह इस जल को अपनी तरफ कर्षित कर ले अर्थात आकर्षित कर ले ।

भगवान की आज्ञा पाकर दाऊ जी ने सारे के सारे जल को आकर्षित कर लिया और और ब्रज वासियों की दृष्टि में वह सारा जल एक कुंड में एकत्रित होता रहा। इसलिए यहां एक कुंड सा बन गया।
उनकी दृष्टि के लिए इस स्थान पर एकत्रित होने जैसा दर्श है  जल को कर्षित अर्थात आकर्षित करने के कारण भगवान श्री कृष्ण ने ने उन्हें संकर्षण नाम दिया इसीलिए इस कुण्ड का नाम संकर्षण कुंड रखा गया।

यह है इस कुंड के निर्माण की कहानी।



ब्रज चौरासी कोस यात्रा

.                    "ब्रज चौरासी कोस यात्रा"           ब्रज  चौरासी कोस की परिकम्मा एक  देत।           लख  चौरासी योनि  के  संकट ...