यह स्थान आन्योर के निकट स्थित है क्योंकि यहीं पर भगवान ने गिरिराज गोवर्धन को धारण किया था। संकर्षण भगवान बलराम का एक नाम है और इस स्थान का नाम संकर्षण कैसे पड़ा आइए आपको बताते हैं। संकर्षण जी यह जो विग्रह आप देख रहे हैं यह विग्रह पूरे ब्रज मंडल का संकर्षण जी का सबसे बड़ा विग्रह माना जाता है।
संकर्षण कुंड वह स्थान है जहां पर इंद्र वृष्टि का जल गोवर्धन पर्वत के चारों तरफ गिर रहा था तो इतनी भारी मात्रा में जल वृष्टि होने के कारण, इस स्थान की भूमि धंसने लगी तो भगवान श्री कृष्ण ने बलराम जी को इशारा किया कि वह इस जल को अपनी तरफ कर्षित कर ले अर्थात आकर्षित कर ले ।
भगवान की आज्ञा पाकर दाऊ जी ने सारे के सारे जल को आकर्षित कर लिया और और ब्रज वासियों की दृष्टि में वह सारा जल एक कुंड में एकत्रित होता रहा। इसलिए यहां एक कुंड सा बन गया।
उनकी दृष्टि के लिए इस स्थान पर एकत्रित होने जैसा दर्श है जल को कर्षित अर्थात आकर्षित करने के कारण भगवान श्री कृष्ण ने ने उन्हें संकर्षण नाम दिया इसीलिए इस कुण्ड का नाम संकर्षण कुंड रखा गया।
यह है इस कुंड के निर्माण की कहानी।
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