Monday, November 16, 2020

श्री राधा कौन है?

श्री राधा कौन है?
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भक्ति प्रधान आचार्य और भगवान के अवतार देवर्षि नारदजी ने भगवान भूतभावन सदाशिव केश्री चरणों में सादर प्रणाम कर पूछा: “हे
महाभाग ! मैं आपका दास हूँ ।
बतलाइए कि, श्रीराधादेवी
लक्ष्मी हैं या देवपत्नी,
महालक्ष्मी हैं या सरस्वती हैं ?
क्या वे अंतरंगा विद्या हैं, या वैष्णवी प्रकृति हैं?
कहिए, वे वेदकन्या हैं, देवकन्या हैं अथवा मुनिकन्या हैं ?’’
सदाशिव बोले – “हे मुनिवर ! अन्य किसी लक्ष्मी की बात क्या कहें, कोटि-कोटि
महालक्ष्मी भी उनके चरण कमल की शोभा के
सामने तुच्छ कही जाती हैं।
हे नारद जी ! एक मुंह से मैं अधिक क्या कहूं? मैं तो श्रीराधा के रूप, लावण्य और गुण आदि का वर्णन करने मे अपने को असमर्थ पाता हूं । उनके रूप आदि की महिमा कहने में भी लज्जित हो रहा हूं।
तीनों लोकों में कोई भी ऐसा समर्थ नहीं है जो उनके रूपादि का वर्णन करके पारावार पा
सके । उनकी रूपमाधुरी जगत को मोहने वाले श्रीकृष्ण को भी सदा मोहित करने वाली है । यदि अनंत मुखो से चाहूं तो भी उनका वर्णन करने की मुझमें क्षमता नहीं है।”
जो मनुष्य निरंतर ‘राधा-राधा’ कहता है तथा राधारानी
का स्मरण करता है, वह सब तीर्थों के संस्कारो से युक्त होकर सब प्रकार की विद्याओं में कुशल बनता है।
जो राधा-राधा कहता है, राधा-राधा कहकर पूजा करता है,
श्रीराधा में जिसकी निष्ठा है, वह महाभाग श्रीधाम वृन्दावन में श्रीराधा की सहचरी होता 
है।
 
कृष्णभक्त वैष्णव सर्वदा अनन्यशरण होकर जब
श्रीराधा की भक्ति प्राप्त करता है तो सुखी, विवेकी और निष्काम हो जाता है।
श्रीराधा पूर्णतम पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की
अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए भगवान सदा इनके अधीन रहते हैं ।
यह संपूर्ण कामनाओं का राधन (साधन) करती हैं,
इसी कारण इन्हें श्रीराधा कहा गया है।
भगवान कृष्ण स्वयं कहते हैं, कि राधा उनकी आत्मा है, वह राधा में,और राधा उनमें बसती है !
♡श्री राधा राधा♡
♡श्री राधा राधा♡
♡श्री राधा राधा♡

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