Monday, November 16, 2020

राधा जी के 32 नामों का स्मरण

श्री राधा जी के 32 नामों का स्मरण करने से जीवन में सुख, प्रेम और शांति का वरदान मिलता है. धन और संपंत्ति तो आती जाती है. जीवन में सबसे जरूरी है प्रेम और शांति. श्री राधा जी के यह नाम जीवन को शांत और सुखमयी बनाते हैं.
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🌷श्री राधा के 32 नामों को जपने से सफल रहेगा प्रेम💖
🌷श्रीराधा के 32 नाम🌷
श्री राधा जी के 32 नामों का स्मरण करने से जीवन में सुख, प्रेम और शांति का वरदान मिलता है. धन और संपंत्ति तो आती जाती है. 
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जीवन में सबसे जरूरी है प्रेम और शांति. श्री राधा जी के यह नाम जीवन को शांत और सुखमयी बनाते हैं. 
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जो भी श्रद्धापूर्वक राधा जी के नाम का आश्रय लेता है वह प्रभु की गोद मै बैठ कर उनका स्नेह पाता है. 
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ब्रह्मवैवर्त पुराण में स्वयं श्री हरि विष्णु जी ने कहा है कि जो व्यक्ति अनजाने मैं भी राधा कहता है उसके आगे मैं सुदर्शन चक्र लेकर चलता हूं. 
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उसके पीछे स्वयं शिव जी उनका त्रिशूल लेकर चलते हैं. उसके दाईं ओर इंद्र वज्र लेकर चलते हैं और बाईं तरफ वरुण देव छत्र लेकर चलते हैं.
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1 : मृदुल भाषिणी राधा ! राधा !!

2 : सौंदर्य राषिणी राधा ! राधा !!

3 : परम् पुनीता राधा ! राधा !!

4 : नित्य नवनीता राधा ! राधा !!

5 : रास विलासिनी राधा ! राधा !!

6 : दिव्य सुवासिनी राधा ! राधा !!

7 : नवल किशोरी राधा ! राधा !!

8 : अति ही भोरी राधा ! राधा !!

9 : कंचनवर्णी राधा ! राधा !!

10 : नित्य सुखकरणी राधा ! राधा !!

11 : सुभग भामिनी राधा ! राधा !!

12 : जगत स्वामिनी राधा ! राधा !!

13 : कृष्ण आनन्दिनी राधा ! राधा !!

14 : आनंद कन्दिनी राधा ! राधा !!

15 : प्रेम मूर्ति राधा ! राधा !!

16 : रस आपूर्ति राधा ! राधा !!

17 : नवल ब्रजेश्वरी राधा ! राधा !!

18: नित्य रासेश्वरी राधा ! राधा !!

19 : कोमल अंगिनी राधा ! राधा !!

20 : कृष्ण संगिनी राधा ! राधा !!

21 : कृपा वर्षिणी राधा ! राधा !!

22: परम् हर्षिणी राधा ! राधा !!

23 : सिंधु स्वरूपा राधा ! राधा !!

24 : परम् अनूपा राधा ! राधा !!

25 : परम् हितकारी राधा ! राधा !!

26 : कृष्ण सुखकारी राधा ! राधा !!

27 : निकुंज स्वामिनी राधा ! राधा !!

28 : नवल भामिनी राधा ! राधा !!

29 : रास रासेश्वरी राधा ! राधा !!

30 : स्वयं परमेश्वरी राधा ! राधा !!

31: सकल गुणीता राधा ! राधा !!

32 : रसिकिनी पुनीता राधा ! राधा !!
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कर जोरि वन्दन करूं मैं_
नित नित करूं प्रणाम_
रसना से गाती रहूं_
श्री राधा राधा नाम !!
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🌷राधा रानी भक्त गुलाब सखी🌹
श्री बरसाने में प्रेम सरोवर के मार्ग पर एक समाधी बनी हुई है। जिसे हर कोई गुलाब सखी के चबूतरे के नाम से जानते है। एक भक्त का नाम गुलाब था। गुलाब एक गरीब मुस्लमान  था। 
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श्री राधा रानी सब पर कृपा करती है। ये बात सभी भक्त जानते है। गुलाब बरसाने में श्री जी के मंदिर में सारंगी बजाता था। और जो पैसा मिल जाता था उससे अपना पेट पालते थे। इसकी एक बेटी थी जिसका नाम था राधा।
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जब भजन कीर्तन गायन होता था तो वो लड़की बड़ा भाव विभोर होकर राधा रानी के सामने नृत्य करती थी। 
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जब कन्या बड़ी हुई तो लोगो ने कहना शुरू कर दिया गुलाब अब तो तेरी बेटी जवान हो गई है। अब इसके लिए कोई लड़का देख ना। तो उस भक्त ने कहा की राधा रानी की बेटी है जब वो कृपा करेगी तो शादी हो जाएगी। 
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मेरे पास इतना पैसा नही है की मैं व्यवस्था कर सकू। लोगो ने कहा की तुम लड़का तो देखो व्यवस्था हम कर देंगे। तो उस भक्त गुलाब ने एक लड़का देखा और बेटी का विवाह कर दिया।
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बेटी चली गई अपनी ससुराल। 3 दिन हो गए पर बेटी को भुला नही पा रहा है। खाना-पीना सब छूट गया। ना सारंगी बजाई, ना समाज गायन में गया लेकिन एक दिन रात्रि को श्री जी के मंदिर के द्वार पर बैठ गया।
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🌷श्री राधा जी🌹गुलाब सखी से बोली :-🌷
ठीक रात्रि के 12 बजे उसे एक आवाज सुनाई दी। तभी एक छोटी सी बालिका उसे दौड़ती हुई दिखाई दी और गुलाब सखी के पास आई और बोली की बाबा, बाबा। आज सारंगी नाय बजायेगो? 
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मैं नाचूंगी।
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जब उसने आँख खोल के देखा तो एक सुंदर बालिका खड़ी है। उसने पास रखी सारंगी उठाई  और बजाना शुरू कर दिया। 
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वो लड़की नृत्य करते हुए सीढ़ियों की और भागी। गुलाब ने अपनी सारंगी रख दी और राधा राधा कहते हुए उस लड़की की और दौड़ा। 
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लेकिन उसके बाद वो वहां किसी को नही दिखा। श्री जी में समां गया। लोगो ने सोचा की इसका खाना पीना छूट गया था कहीं ऐसा तो नही की पागल होकर मर गया हो।
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💐गोस्वामी जी के सामने अचानक गुलाब सखी आ गए :-🌹
लोग भूल गए महीनो निकल गए। लेकिन एक दिन रात्रि में गोस्वामी जी राधा रानी को शयन करवा कर मंदिर की परिक्रमा में आ रहे थे। तो झाड़ी के पीछे से निकला।
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पुजारी ने पूछा की कौन है?
वो बोला-तिहारो गुलाब।
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पुजारी ने कहा की-गुलाब तो मर गया है।:- उसने कहा की मैं मरा नही हूँ श्री जी के परिकर में सम्मिलित हो गया हूँ।
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गोस्वामी जी ने पूछा की कैसे?:-
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तो उसी समय गुलाब ने गोस्वामी जी के हाथ में पान की बिरि रखी जो अभी अभी राधा रानी को शयन के समय भोग लगा के आये थे। इतना कह कर वो झाड़ियों के अंदर चला गया और फिर कभी नही दिखा।
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आज भी बरसाने में गुलाब सखी जी की समाधि है। जिसे गुलाब सखी का चबूतरा कहते है।
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आपके मन में ये प्रश्न हो सकता है की उसने अपनी बेटी को याद किया था तो उसकी मुक्ति कैसे?
राधा कोई साधारण नाम नही है। ये महाशक्ति का नाम है। इस नाम की महिमा वही जान सकते है जिसने इस नाम को लिया होगा इस नाम के संग जिया होगा।
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जो राधा नाम लेता है उसके आगे भगवान विष्णु चलते है। पीछे भगवान शिव चलते है। दाहिने इंद्र वज्र ले के चलता है और बांये वरुण उसके ऊपर छात्र लेके चलता है।
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यदि राधा नाम भूल से भी निकल जाये तो भी राधा रानी उसे अपना लेती है।
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