Monday, November 16, 2020

कान्हा के पास बंशी कहाँ से आई!

*!!कान्हा के पास बंशी कहाँ से आई!!*
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*कहते है की श्रीकृष्ण को बंशी👉 भोलेशंकर ने ही प्रदान की थी। एक बार वो नन्हें कन्हैया के दर्शन हेतु आए थे तब। कहते है की कृष्ण की तीन बंशीया थी अलग अलग आकार और प्रकार की" 1👉एक का नाम वेणु,👉दूसरी का नाम मुरली,और👉 तीसरी का नाम वामसी था।* 

*वेणु सबसे छोटी बंशी है। लगभग छः इंच की। इसमें सात छेद होते है।*

 *मुरली लगभग 18 इंच की बंशी होती है।इसमें एक छेद किनारे पर और चार छेद मध्य में रहते है।*

*वामसी लगभग १५ इंच की बंशी*
 *है।इसमें कुल नौ छेद होते है।*

*वामसी का अन्य नाम सम्मोहिणी या महानंदा भी है।इससे भी बड़ी वंशी आनंदिनी कही जाती है। प्रभु इन सभी वंशी को बजाने में निष्णत थे।वे इन सभी वंशीयो को आनंद से बजाते थे।* 

*जब इन वंशियों को माणिक़ से सजाया जाता था।तो ये अक्षसिणी कहलाई जाती है।*

*कृष्ण स्वर्ग, कृष्ण मोक्ष,*
      *कृष्ण परम साध्य है !*

*कृष्ण जीव,कृष्ण ब्रह्म,*
     *कृष्ण ही आराध्य है!!*

😀😀🔔🔔
 बांसुरी भगवान श्री कृष्‍ण को अति प्रिय है, क्योंकि बांसुरी में तीन गुण है... 

पहला - बांसुरी में गांठ नहीं है, जो संकेत है कि अपने अंदर किसी भी प्रकार की गांठ मत रखो यानि मन में 
बदले की भावना मत रखो 

दूसरा गुण- बिना बजाये ये बजती नहीं है, मानो ये बता रही है कि जब तक आवश्यक नही हो, ना बोलें।

और तीसरा- जब भी बजती है, मधुर ही बजती है। अर्थात जब भी बोलो....... 
 मीठा ही बोलो
💦जय श्री कृष्णा💦🍃🍃
        
  *!!बंशीवाले की जय हो!!*
            ✍☘💕

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