आज भी हमारे बरसाना और नंदगांव जैसे गाँव आपको दुनिया में कहीं नहीं मिलेंगे
दोनों में सिर्फ पांच छह मील का फर्क है !! ऊंचाई से देखने पर दोनों एक जैसे ही दीखते हैं !!
आज तक बरसाना वासी राधा को अपनी बेटी और नंदगांव वाले कान्हा को अपना बेटा मानते हैं !!
कितने ही बरस बीत गए परन्तु उन लोगों के भावों में फर्क नहीं आया !!
आज तक बरसाने की लड़की नंदगांव में ब्याही नहीं जाती सिर्फ इसलिए की नया रिश्ता जोड़ लिया तो पुराना भूल जाएगा !!
हमारा राधाकृष्ण से प्रेम कम ना हो इसलिए हम नया रिश्ता नहीं जोड़ेंगे आपस में !!
आज भी नंदगांव के कुछ घरों की स्त्रियां घर के बाहर मटकी में माखन रखती हैं कान्हा ब्रज में ही है वेश बदल कर आएगा और माखन खायेगा !!
जहां 10 -12 बच्चे खेल रहे हैं उनमे एक कान्हा जरूर है ऐसा उनका भाव है आज भी !!
ब्रज भूमि को भाव से देखिये वरना जाना बेकार है
लेकिन आज भी बरसाने का वृद्द नंदगांव आएगा तो प्यास चाहे तड़प ले पर एक बूँद पानी नहीं पियेगा नंदगांव का क्योंकि उनके बरसाने की राधा का ससुराल नंदगांव है !!
और बेटी के घर का पानी भी नहीं पिया जाता उनका मानना आज भी जारी है !!
इतने प्राचीन सम्बन्ध को आज भी निभाया जा रहा है !!
धन्य है ब्रज भूमि का कण कण
करोड़ों बार प्रणाम मेरे प्रियतम प्रभु की जनम भूमि ,लीलाभूमि व् प्रेमभूमि को....👏👏
ये सच्चाई है वहाँ की में धन्य हूँ जो मुझे यहाँ जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
🌹🌷 *जय श्री कृष्णा*🌷🌹
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