राधे राधे
टेर कदम्ब
राधे राधे
कदम्ब चढ़ि, श्याम बुलावत गैया ।
कारी, काँमर, धौरी, धूमर अब घर को बगदैया ॥
यह स्थान श्री कृष्ण बलराम की गौचारण भूमि- क्रीडा स्थली है।
श्री रूप गोस्वामीजी की भजन स्थली है। ऐसा कहा जाता है कि 500, साल पूर्व इस स्थान पर श्री रूप गोस्वामी ने भजन किया करते थे।
गोस्वामीजी ने इसी स्थान पर भक्ति ग्रन्थ-भक्तिरसामृत सिन्धु, उपदेशामृत, ललित माधव, विदग्ध माधवादि ग्रन्थ आदि की रचना करके विशुद्ध वैष्णव धारा प्रवाहित की।
श्री कृष्ण लीलायें जैसे निकुंज सेवा, विलासी रूप मंजरी, अधुना श्री गौर लीलायें, श्री रूप गोस्वामी, श्री मन महाप्रभु मन की इच्छा-लुप्त तीर्थ (लीला स्थली), प्रकाश-विकास, सेवा बिग्रह स्थापन,
श्री सनातन पाद गोस्वामीजी एक समय श्री रुप पाद गोस्वामीजी के दर्शन के लिये आये। उसी समय उन्होंने देखा कि श्री राधा रानी उनके लिए खीर लेकर आई हैं।। तभी से गौरीय वैष्णव द्वारा खीर भोग के साथ नित्य सेवा पूजा चली आ रही है।
श्री सनातन पाद, श्री रुप पाद के पास दोपहर दर्शन के लिए आये तो उन्होंने देखा कि श्री राधा रानी उनके लिए खऔर लाई है ।
टेर कंदम्ब
कदम्ब चठि स्याम बुलावत गया श्री कृष्ण की गौचारण भूमि
श्री रूप पाद की भजन स्थली गौडीय आचार्य श्री रुप पाद-यहाँ सजन करते है-श्री भवित रखा - मृत सिन्धु ग्रन्थ आदि की रचना की।
तमी से जैडीय वैष्णव के द्वारा सेवा-पूजा हो रही है, होती रहेगी
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विकासादि हो रहा है, होते रहेंगे
व्यवस्थापक - श्री बी. बी. हृषीकेश महाराज
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