Monday, November 16, 2020

बारहमासा

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    *अभियान* एक प्रयास...🌹

    *प्रथम* महीना चैत से गिन।
    राम जनम का जिसमें दिन॥
 
    *द्वितीय* माह आया बैशाख।
    बैसाखी पंचनद की साख॥
 
    ज्येष्ठ मास को जान *तीसरा*।
    अब तो जाड़ा सबको बिसरा॥
 
    *चौथा* मास आया आषाढ़।
    नदियों में आती है बाढ़॥
 
    *पाँचवें* सावन घेरे बदरी।
    झूला झूलो गाओ कजरी॥
 
    भादौ मास को जानो *छठा*।
    कृष्ण जनम की सुन्दर छटा॥ 
 
    मास *सातवाँ* लगा कुंआर।
    दुर्गा पूजा की आई बहार॥ 
 
    कार्तिक मास *आठवाँ* आये।
    दीवाली के दीप जलाये॥
 
    *नवाँ* महीना आया अगहन।
    सीता बनी राम की दुल्हन॥ 
 
    पूस मास है क्रम में *दस*।
    पीओ सब गन्ने का रस॥
 
    *ग्यारहवाँ* मास माघ को गाओ।
    समरसता का भाव जगाओ॥ 
 
    मास *बारहवाँ* फाल्गुन आया।
    साथ में होली के रंग लाया॥ 
 
    *बारह मास हुये अब पूरे।*
    *छोड़ो न कोई काम अधूरे॥*

    *नववर्ष मंगलमय हो !* 🙏🌹🙏 .
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