*अभियान* एक प्रयास...🌹
*प्रथम* महीना चैत से गिन।
राम जनम का जिसमें दिन॥
*द्वितीय* माह आया बैशाख।
बैसाखी पंचनद की साख॥
ज्येष्ठ मास को जान *तीसरा*।
अब तो जाड़ा सबको बिसरा॥
*चौथा* मास आया आषाढ़।
नदियों में आती है बाढ़॥
*पाँचवें* सावन घेरे बदरी।
झूला झूलो गाओ कजरी॥
भादौ मास को जानो *छठा*।
कृष्ण जनम की सुन्दर छटा॥
मास *सातवाँ* लगा कुंआर।
दुर्गा पूजा की आई बहार॥
कार्तिक मास *आठवाँ* आये।
दीवाली के दीप जलाये॥
*नवाँ* महीना आया अगहन।
सीता बनी राम की दुल्हन॥
पूस मास है क्रम में *दस*।
पीओ सब गन्ने का रस॥
*ग्यारहवाँ* मास माघ को गाओ।
समरसता का भाव जगाओ॥
मास *बारहवाँ* फाल्गुन आया।
साथ में होली के रंग लाया॥
*बारह मास हुये अब पूरे।*
*छोड़ो न कोई काम अधूरे॥*
*नववर्ष मंगलमय हो !* 🙏🌹🙏 .
.
No comments:
Post a Comment